Wednesday, February 15, 2012

संसार का सबसे दुःखी इंसान

राजा का दरबार लगा हुआ था। उस दिन दरबार मे चर्चा का विषय था कि इस संसार में सबसे दुःखी इंसान कौन है?
सभी दरबारियों ने अपनी-अपनी राय रखी। सभी दरबारियों में आपस में मतभेद था। अंततः वे सभी इस नतीजे पर पहुंचे कि यदि कोई गरीब और बीमार हैं तो वह सबसे ज्यादा दुःखी है।

इस नतीजे से राजा संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपने सबसे समझदार दरबारी चतुरनाथ की ओर देखा, जिसने सारी बहस चुपचाप सुनी थी। राजा ने चतुरनाथ से पूछा - "तुम्हारी इस बारे में क्या राय है?"

चतुरनाथ ने उत्तर दिया - "हे महाराज! मेरी इस बारे में विनम्र राय यह है कि जो व्यक्ति ईर्ष्यालु और द्वेषी है, वह हमेशा दुःखी रहता है। वह दूसरा को अच्छा कार्य करते हुए देखकर दुःखी होता है। उसका चित्त कभी शांत नहीं रहता। वह हमेशा शंकालु रहता है। वह दूसरों का भला होते देख नफरत से भर जाता है। ऐसा इंसान ही संसार में सबसे ज्यादा दुःखी होता है।"



आवाज़ें बारिश की सुनी हैं कभी?


 आवाज़ें बारिश की

 

आवाज़ें बारिश की
सुनी हैं कभी?
सीमेंटिड आंगन पर
टिन की छतों पर
हरे चिकने पत्तों पर
खुली पानी की टंकियों पर
पत्थरों पर
सड़कों पर
गलियों में गिरती बारिश
हर बार हर जगह
अलग अंदाज़ के साथ
गिरती है बारिश
हर मंज़िल पर
अलग आवाज़ो का रास्ता
तय करती है बारिश
लेकिन
अंत उसका
एक सा ही होता है
चाहे चुपके से गिरे
चाहे झमाझम
गिरके खो जाती है
बारिश...

निशान

निशान

 


आज सुबह

जब पलकों की चादर

आंखों से हटी
कुछ अलग था नज़ारा,
खिड़की से धूप नहीं
बह रही थी
ठंडी हवा,
दरवाज़े के पास
पड़ी थी कुछ
गीली-पीली पत्तियां,
टपक रही थी मचान से
आवाज़े महीन
और
दहलीज़ पर जमा था
मटमैला पानी,
कुछ नन्ही बूंदे
शीशे पर घर बनाए,
पड़ोस के पेड़ पर
बैठे थे
पर फरफराते,
कुछ पक्षी,
घास पर उतरी
हीरे सी बूंदें,
और अंत में
एक गीली मुस्कान
चेहरे पर
औऱ ज़हन में ख्याल
समेट लूं
इन निशानों को
जिन्हें छोड़ गई
कल रात बारिश..!







 

 

नया रिश्ता

नया रिश्ता


सुबह-सुबह दरवाज़े पर
सूरज की पहली किरण
संग आज ले आई
एक नया महमान
एक ताज़ी हवा का झोंका,
मुझे देख
वो कुछ मुस्कुराया
कुछ हिचकिचाया
फिर बना लिया मुझसे
एक रिश्ता नया,
रुख्सारों को सहलाकर
बालों को उलझाकर
वो फैल गया कमरे में,
धूल से ढकी
कुछ पुरानी तस्वीरों संग
खेला वो झोंका हवा का,
मेरी खुली डायरी को
पन्ने दर पन्ने पलटकर
बांचता रहा कुछ देर
मुझे कुछ जान समझकर
वो आगे बढ़ा,
कानों में कुछ फुसफुसाया
और कहा
कल फिर मिलने आउंगा
जब तुम अपने जज्बातों को
डायरी में बंद करके
खुदको तनहा करके
नींद में होगी
तब चुपके से
तुम्हारी खिड़की से आकर
हौले से तुम्हें जगाउंगा..
( Dinesh.... )